100+ Narazgi Shayari in Hindi | नाराजगी शायरी हिंदी में

Narazgi Shayari में आपका दिल से स्वागत है। यहाँ हमने आपके लिए नाराज़गी, रूठने-मनाने, खामोश शिकायतों और दिल की उलझनों से भरी सबसे इमोशनल और दिल को छू जाने वाली नाराजगी शायरी हिंदी भाषा में तैयार की हैं, जिन्हें आप अपनी मर्जी से WhatsApp, Instagram, Facebook जैसे किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आसानी से शेयर कर सकते हैं। साथ ही, हमने खास तौर पर कुछ इमोशनल और एहसासों से भरी इमेजेज भी डिज़ाइन की हैं, जिन पर लिखी शायरी पढ़कर आपको अपने मन की बात कहने का सुकून मिलेगा।

यहाँ आपको 100 से भी ज्यादा Narazgi Shayari मिलेंगी, जिन्हें आप बिना किसी परेशानी के कॉपी कर सकते हैं। जब भी किसी अपने से दिल रूठ जाए, बात अधूरी रह जाए या जज़्बात कहे बिना रह जाएँ तो Narazgi Shayari in Hindi आपके एहसासों को बयां करने और रिश्तों में फिर से नर्मी लाने का बेहतरीन सहारा बन सकती है। तो देर किस बात की? चलिए, नीचे दिए गए नाराज़गी और एहसासों से भरे शानदार कलेक्शन पर एक नज़र डालते हैं।

Narazgi Shayari

Narazgi Shayari

नाराज़गी भी मोहब्बत का हिस्सा है,
बस हर कोई समझ नहीं पाता।

तुम्हारी एक बात ने,
मेरी कई खामोशियाँ बढ़ा दीं।

नाराज़गी शब्दों से नहीं,
चुप्पी से ज़्यादा झलकती है।

Narazgi Shayari

तुमसे नाराज़ नहीं हूँ मैं,
बस अब पहले जैसा भरोसा नहीं रहा।

खामोशी मेरी नाराज़गी की पहचान है,
वरना बातें तो मैं भी बहुत करता था।

नाराज़गी इसलिए नहीं कि तुम गलत थे,
दर्द इसलिए है कि तुम बदल गए।

Narazgi Shayari

रूठना आदत नहीं मेरी,
पर चोट गहरी लगी है।

जब अपनों से नाराज़गी हो,
तो शिकायत भी खामोश हो जाती है।

नाराज़ हूँ पर नफ़रत नहीं है,
फर्क बस इतना है।

तुमसे उम्मीद थी,
इसी बात की नाराज़गी है।

Narazgi shayari 2 lines in hindi

Narazgi shayari 2 lines in hindi

नाराज़गी जताई नहीं जाती,
वो खुद-ब-खुद महसूस हो जाती है।

बातें कम हो गई हैं,
यही मेरी नाराज़गी की वजह है।

नाराज़गी में भी तुम्हारी फिक्र है,
बस अब जताते नहीं।

Narazgi shayari 2 lines in hindi

तुमसे दूर होकर भी,
नाराज़गी पास ही रहती है।

दिल टूटा है,
इसलिए जुबान चुप है।

नाराज़गी शब्दों में नहीं,
मेरी आँखों में देख लो।

Narazgi shayari 2 lines in hindi

तुम समझ जाते तो अच्छा था,
बार-बार बताने की नाराज़गी है।

अब सवाल नहीं पूछते,
यही सबसे बड़ी नाराज़गी है।

नाराज़ हूँ इसलिए नहीं बोलता,
वरना जवाब तो बहुत हैं।

अपनों की बेरुखी,
नाराज़गी बनकर रह जाती है।

Narazgi Shayari love

Narazgi Shayari love

नाराज़गी में भी इंतज़ार है,
शायद तुम मान जाओ।

दिल भरा हुआ है,
इसलिए आवाज़ नहीं निकलती।

नाराज़गी तब होती है,
जब परवाह अब भी बाकी हो।

Narazgi Shayari love

अब गिले-शिकवे नहीं करते,
क्योंकि उम्मीद ही नहीं रही।

तुमसे नाराज़ होकर भी,
तुम्हारा ही इंतज़ार है।

नाराज़गी मेरी आदत नहीं थी,
पर तुम्हारे बर्ताव ने सिखा दी,
खामोश रहना बेहतर होता है।

Narazgi Shayari love

हम चुप हैं तो मतलब ये नहीं,
कि दर्द नहीं है,
बस अब समझाना छोड़ दिया है।

नाराज़गी में भी इज्ज़त रखी है,
वरना जवाब देने का,
हमें भी पूरा हक़ था।

तुमसे लड़ने का मन नहीं करता,
इसलिए खामोश रह जाता हूँ,
यही मेरी नाराज़गी है।

नाराज़ हूँ मगर दूर नहीं गया,
शायद दिल अब भी मानना चाहता है,
कि तुम बदलोगे।

Narazgi par Shayari in Hindi

Narazgi par Shayari in Hindi

जब उम्मीदें टूटती हैं,
तो आवाज़ नहीं आती,
बस नाराज़गी बढ़ जाती है।

तुम्हारी बेरुखी ने सिखा दिया,
हर मुस्कान सच्ची नहीं होती,
और हर रिश्ता मजबूत नहीं होता।

नाराज़गी जताई नहीं,
महसूस की जाती है,
और बहुत तकलीफ देती है।

Narazgi par Shayari in Hindi

अब शिकायत भी नहीं करते,
क्योंकि सुना नहीं जाता,
यही सबसे बड़ी नाराज़गी है।

तुमने समझा ही नहीं,
और मैंने समझाना छोड़ दिया,
यहीं से नाराज़गी शुरू हुई।

नाराज़गी में भी तुम्हारा ख्याल है,
बस अब दिल थक गया है,
हर बार समझाते-समझाते।

Narazgi par Shayari in Hindi

जब अपने बदल जाएँ,
तो गुस्सा नहीं आता,
बस खामोशी छा जाती है।

नाराज़ हूँ पर छोड़ नहीं सकता,
यही कमजोरी है मेरी,
और यही मोहब्बत।

तुमसे बात कम हुई है,
पर फिक्र कम नहीं हुई,
इसी उलझन का नाम नाराज़गी है।

नाराज़गी ने सिखा दिया,
हर रिश्ता बराबरी का नहीं होता,
कोई ज्यादा झुकता है।

Meri Narazgi Shayari

तुमसे दूर रहकर भी,
तुम्हारे ही ख्यालों में हूँ,
यही नाराज़गी की सजा है।

जब दिल दुखता है,
तो शब्द नहीं निकलते,
बस आंखें बोलती हैं।

नाराज़गी और प्यार,
एक ही दिल में रहते हैं,
फर्क सिर्फ वक्त का होता है।

तुम्हारी एक अनदेखी,
मेरी कई रातें खराब कर गई,
यही मेरी नाराज़गी है।

नाराज़गी इसलिए नहीं कि तुम गलत थे,
इसलिए है कि तुम मेरे अपने थे,
और फिर भी नहीं समझ पाए।

अब रूठते नहीं हैं,
क्योंकि मनाने वाला कोई नहीं,
यही सच है।

नाराज़गी में भी उम्मीद रखी है,
शायद एक दिन तुम,
मेरी खामोशी पढ़ लो।

जब बातों की जगह चुप्पी ले ले,
तो समझ लेना,
नाराज़गी बहुत गहरी है।

तुमसे शिकायत भी नहीं रही,
क्योंकि अब फर्क नहीं पड़ता,
यही सबसे बड़ी नाराज़गी है।

नाराज़ हूँ, पर खत्म नहीं हुआ,
बस थोड़ा टूट गया हूँ,
तुम्हारे बदल जाने से।

अगर परवाह होती,
तो मेरी खामोशी समझ लेते,
नाराज़गी जताने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

नाराज़गी में भी मोहब्बत है,
वरना छोड़ना आसान था,
चुप रहना मुश्किल है।

अब नाराज़ भी नहीं होते,
क्योंकि उम्मीदें ही नहीं रहीं,
यही सबसे भारी दर्द है।

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